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मिट्टी के फूल
Wednesday, March 26, 2008
सच
जीवन मे रस है
या रस मे जीवन है,
अधूरेपन मे पूर्णता
या पूर्णता ही अधूरापन है,
बंधन मे आज़ादी है
या आज़ादी ही बंधन है,
खुशी क्या दीवानगी है
या दीवानगी ही खुशी है,
क्षितिज कपोल कल्पना है
या दूर से दिखने वाला सच
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