एक अकेला पंछी, दरख्त ने सहारा दिंया, अपनी आंखों से जन्नत का नज़ारा दिया, ऊम्र गुज़ारी दरख्त मे रहते, उसको अपना आशियाँ कहते, एक अकेला दरख्त, पंछी ने गुज़ारा दिया........
रंग दे बसन्ती श्वेत वस्त्र, तज दे भक्ति की माला, कर ले आसक्ति जग मे, भर ले प्रेम का प्याला, बांहों मे उत्साह भर ले, सीने मे अरमान की ज्वाला, आंखों मे दुनिया समों ले, पीकर सारी मधुशाला...