Sunday, August 31, 2008

गहराइयाँ बढ़तीं हैं साहिलों के बाद,
नजदीकियां बढ़तीं हैं फासलों के बाद,
उसूल-ऐ-रिश्ता राह है,
मंजिल मिलती है दिलों के बाद
लोक्साद

3 comments:

शोभा said...

बहुत बढ़िया। स्वागत है आपका।

लोकेश Lokesh said...

स्वागत।
लेकिन आने वाले जान लें- यह 'अदालत' वाले लोकेश नहीं हैं।

प्रदीप मानोरिया said...

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