आरजू ए मोहब्बत जरा सी काफी है,
जिन्दा रहने और जीने मे फासले के लिए.
दिल की लगी आँखों से बयां होती है,
है लगी कम या ज्यादा फैसले के लिए,
मोहब्बत का वजूद दिलो मे सुकून से है,
इज़हार-ए-उल्फत है जहां के कायदे के लिए.
दस्तूर-ए-इश्क मे पड़े आशिक जितने,
अकेले ही काफी थे सारे काफिले के लिए.
Saturday, April 25, 2009
Thursday, April 23, 2009
संतुष्टि
एक था बच्चा,
अकल का कच्चा,
जाने क्या चाहता था,
बस भागता ही रहता था,
कभी बागों मे,
कभी जंगलों मे,
कभी खेतो मे,
कभी रस्ते पर,
जाने क्या ढूंढ़ता था,
बस पूछता ही रहता था,
कभी पक्षी से,
कभी पेडो से,
कभी नदियों से,
कभी शहरों से,
जाने क्या मांगता था,
बस बोलता ही रहता था,
कभी रोकर,
कभी गाकर,
कभी हंसकर,
कभी हंसाकर,
एक दिन एक तितली उडी,
रंग बिरंगी, बहुत सुन्दर,
बच्चे ने देखा,
और लगा भागने तितली के पीछे,
लगा पूछने उससे,
ओ सुन्दर चंचल तितली
कहा से आती हो और कहा को जाती हो,
क्यों तुम मेरे मन को भाती हो,
बरबस मुझे पास बुलाती हो,
फिर भी मेरे हाथ न आती हो,
तितली ने न कहा न सुना,
बस उड़ती गयी,
जंगलो से खेतो से,
बागो से शहरो से,
रस्तों से गलियों से,
बच्चा जब थक गया पक गया ,
चुपचाप वो बैठ गया,
तितली रानी बड़ी सयानी,
बच्चे के कंधे पर आकर बैठ गयी,
बच्चा बड़ा खुश हुआ,
मेहनत से सन्तुष्ट हुआ.
अकल का कच्चा,
जाने क्या चाहता था,
बस भागता ही रहता था,
कभी बागों मे,
कभी जंगलों मे,
कभी खेतो मे,
कभी रस्ते पर,
जाने क्या ढूंढ़ता था,
बस पूछता ही रहता था,
कभी पक्षी से,
कभी पेडो से,
कभी नदियों से,
कभी शहरों से,
जाने क्या मांगता था,
बस बोलता ही रहता था,
कभी रोकर,
कभी गाकर,
कभी हंसकर,
कभी हंसाकर,
एक दिन एक तितली उडी,
रंग बिरंगी, बहुत सुन्दर,
बच्चे ने देखा,
और लगा भागने तितली के पीछे,
लगा पूछने उससे,
ओ सुन्दर चंचल तितली
कहा से आती हो और कहा को जाती हो,
क्यों तुम मेरे मन को भाती हो,
बरबस मुझे पास बुलाती हो,
फिर भी मेरे हाथ न आती हो,
तितली ने न कहा न सुना,
बस उड़ती गयी,
जंगलो से खेतो से,
बागो से शहरो से,
रस्तों से गलियों से,
बच्चा जब थक गया पक गया ,
चुपचाप वो बैठ गया,
तितली रानी बड़ी सयानी,
बच्चे के कंधे पर आकर बैठ गयी,
बच्चा बड़ा खुश हुआ,
मेहनत से सन्तुष्ट हुआ.
वो शम्मा भी चली गयी.
दिन गुज़र गया,
रात भी चली गयी,
जो दिल मे थी,
हर बात भी चली गयी.
सहारा था जिसका,
इशारा था उसका,
एक इशारे के साथ,
वो बात भी चली गयी.
नज़रों का धोखा था,
या मरहम दिल का,
दो पल की वो आशनाई,
दर्द देकर चली गयी.
अब क्या आरजू,
उनसे मिलने की,
जो आस थी झूठी,
वो आस भी चली गयी,
गमो का अँधेरा,
आज भी साथ है,
उनसे मिलने आई,
वो शम्मा भी चली गयी.
रात भी चली गयी,
जो दिल मे थी,
हर बात भी चली गयी.
सहारा था जिसका,
इशारा था उसका,
एक इशारे के साथ,
वो बात भी चली गयी.
नज़रों का धोखा था,
या मरहम दिल का,
दो पल की वो आशनाई,
दर्द देकर चली गयी.
अब क्या आरजू,
उनसे मिलने की,
जो आस थी झूठी,
वो आस भी चली गयी,
गमो का अँधेरा,
आज भी साथ है,
उनसे मिलने आई,
वो शम्मा भी चली गयी.
Wednesday, April 22, 2009
क्लास ऑफ़ मास
क्लास ऑफ़ मास ,
ये है मिडिल क्लास,
थोडा सा मतलब
और ढेर सी बकवास
ये है मिडिल क्लास
पैदा हुआ मरने के लिए,
जीता गया मरने के लिए
पढता गया लड़ने के लिए
लड़ता गया पढ़ने के लिए
ये है बेरोजगार,
याने मिडिल क्लास
थोडा सा मतलब
और ढेर सी बकवास
त्यौहार मनाता गया
बिल चुकाता गया
लाइन लगता गया
झगडा सुलझाता गया
ये है जनसँख्या,
याने मिडिल क्लास
थोडा सा मतलब
और ढेर सी बकवास
certificate इसको चाहिए
दाखिला इसको चाहिए
मेन्टेन इसको करना है
भगवन को जवाब भी देना है
ये है सभ्य वर्ग,
याने मिडिल क्लास
थोडा सा मतलब
और ढेर सी बकवास
शादी बहुत जरुरी है
क्रियाकर्म बहुत जरुरी है
खर्चीली बहुत बीमारी है
समाज की लाचारी है
ये है मजबूरी,
याने मिडिल क्लास
थोडा सा मतलब
और ढेर सी बकवास
घर घर मे कहानी है
पॉलिटिक्स तो बेमानी है
भाई भाई मे दरार है
बीच मे दीवार है
ये है ड्रामा,
याने मिडिल क्लास
थोडा सा मतलब
और ढेर सी बकवास
यहाँ बच्चा जवान है
जवान बुड्ढा है
बुड्ढा तो मर चूका है
सब वक्त से आगे हैं
ये है रेट रेस,
याने मिडिल क्लास
थोडा सा मतलब
और ढेर सी बकवास
सब वक्त से आगे हैं
पर वक्त तो वही है
जीवन क्या यही है?
ये है मिडिल क्लास,
थोडा सा मतलब
और ढेर सी बकवास
ये है मिडिल क्लास
पैदा हुआ मरने के लिए,
जीता गया मरने के लिए
पढता गया लड़ने के लिए
लड़ता गया पढ़ने के लिए
ये है बेरोजगार,
याने मिडिल क्लास
थोडा सा मतलब
और ढेर सी बकवास
त्यौहार मनाता गया
बिल चुकाता गया
लाइन लगता गया
झगडा सुलझाता गया
ये है जनसँख्या,
याने मिडिल क्लास
थोडा सा मतलब
और ढेर सी बकवास
certificate इसको चाहिए
दाखिला इसको चाहिए
मेन्टेन इसको करना है
भगवन को जवाब भी देना है
ये है सभ्य वर्ग,
याने मिडिल क्लास
थोडा सा मतलब
और ढेर सी बकवास
शादी बहुत जरुरी है
क्रियाकर्म बहुत जरुरी है
खर्चीली बहुत बीमारी है
समाज की लाचारी है
ये है मजबूरी,
याने मिडिल क्लास
थोडा सा मतलब
और ढेर सी बकवास
घर घर मे कहानी है
पॉलिटिक्स तो बेमानी है
भाई भाई मे दरार है
बीच मे दीवार है
ये है ड्रामा,
याने मिडिल क्लास
थोडा सा मतलब
और ढेर सी बकवास
यहाँ बच्चा जवान है
जवान बुड्ढा है
बुड्ढा तो मर चूका है
सब वक्त से आगे हैं
ये है रेट रेस,
याने मिडिल क्लास
थोडा सा मतलब
और ढेर सी बकवास
सब वक्त से आगे हैं
पर वक्त तो वही है
जीवन क्या यही है?
अभी अभी कुछ हुआ
किसी के दिल को रौंदा गया पैरों तले
किसी के घावों पे नमक छिड़का गया,
किसी बेदिल ने अट्टहास किया,
लो फिर वही कहानी दुहराई गयी.
किसी निराश की बेखुदी को छेडा,
किन्ही मासूम खयालो को कुरेदा गया,
किसी नाकाम से दिल्लगी की,
लो फिर आँखों से रुलाई गयी,
शरीर मे लोथड़ों को नोचा
मशीनी सांसो को नापा गया ,
रूह पुरानी जला दी गयी ,
वेश्या सरे-राह नचाई गयी,
गम के पोरों को खोजा,
दिली नासूरों को उधेडा गया,
जले हुए शरीर मे फिर फिर,
मृत्यु ज्योत जलाई गयी.
गमो से दोस्ती,
तन्हाई का साथ,
बेखुदी का आलम,
बेजा हैं ये सब आजकल,
क्या दुनिया से आशनाई गयी?
किसी के घावों पे नमक छिड़का गया,
किसी बेदिल ने अट्टहास किया,
लो फिर वही कहानी दुहराई गयी.
किसी निराश की बेखुदी को छेडा,
किन्ही मासूम खयालो को कुरेदा गया,
किसी नाकाम से दिल्लगी की,
लो फिर आँखों से रुलाई गयी,
शरीर मे लोथड़ों को नोचा
मशीनी सांसो को नापा गया ,
रूह पुरानी जला दी गयी ,
वेश्या सरे-राह नचाई गयी,
गम के पोरों को खोजा,
दिली नासूरों को उधेडा गया,
जले हुए शरीर मे फिर फिर,
मृत्यु ज्योत जलाई गयी.
गमो से दोस्ती,
तन्हाई का साथ,
बेखुदी का आलम,
बेजा हैं ये सब आजकल,
क्या दुनिया से आशनाई गयी?
बात कुछ खास नहीं!!
बिन बात की बात है,
खामोशी की शाम,
तन्हाई की रात है,
रुखा है बसन्त,
सुखी बरसात है,
बिन बात की बात है,
भूखी है क्षुधा,
प्यासी है प्यास,
आँहों मे ठंडक,
सांसे झंझावत है,
बिन बात की बात है,
बातों मे उथलापन,
चाल मे बेसुधी,
बदन मे शिथिलता,
दिल बेहयात है,
बिन बात की बात है,
बेकल हर पल,
हर दृश्य धूमिल,
कर्कश हर ध्वनि,
स्पर्श बलात है,
बिन बात की बात है,
आँखे वीरानी शाम,
सपने खाली मकान,
धड़कन खडखडाहट,
जीवन बंद कपाट है
बिन बात की बात है,
पर जब आप साथ है,
चिंता चिता नहीं,
जीवन बेजान नहीं
केवल है वर्तमान,
न पूर्व-पश्चात् है,
बातों मे क्या बात है?
आपसे ही तो बात है,
क्या आप हमारे साथ हैं?
खामोशी की शाम,
तन्हाई की रात है,
रुखा है बसन्त,
सुखी बरसात है,
बिन बात की बात है,
भूखी है क्षुधा,
प्यासी है प्यास,
आँहों मे ठंडक,
सांसे झंझावत है,
बिन बात की बात है,
बातों मे उथलापन,
चाल मे बेसुधी,
बदन मे शिथिलता,
दिल बेहयात है,
बिन बात की बात है,
बेकल हर पल,
हर दृश्य धूमिल,
कर्कश हर ध्वनि,
स्पर्श बलात है,
बिन बात की बात है,
आँखे वीरानी शाम,
सपने खाली मकान,
धड़कन खडखडाहट,
जीवन बंद कपाट है
बिन बात की बात है,
पर जब आप साथ है,
चिंता चिता नहीं,
जीवन बेजान नहीं
केवल है वर्तमान,
न पूर्व-पश्चात् है,
बातों मे क्या बात है?
आपसे ही तो बात है,
क्या आप हमारे साथ हैं?
Wednesday, April 15, 2009
हाल कैसा है?
हाल क्या कहें आपसे, हमको क्या गम है,
जिंदगी बेवफा है, दिल मे जखम है,
मिलना नसीब नहीं, देखना मगर है,
उजाला पाते नहीं, अँधेरी डगर है.
दुनिया से बेसुध फिरे, भगवान को कोसे,
इनसे होगा क्या, किस्मत ही बेरहम है,
ढ़ोते बोझ अपना, ग़मों से वास्ता कर लिया,
बात नयी क्या हुई? वो गम है ये भी गम है.
जिंदगी बेवफा है, दिल मे जखम है,
मिलना नसीब नहीं, देखना मगर है,
उजाला पाते नहीं, अँधेरी डगर है.
दुनिया से बेसुध फिरे, भगवान को कोसे,
इनसे होगा क्या, किस्मत ही बेरहम है,
ढ़ोते बोझ अपना, ग़मों से वास्ता कर लिया,
बात नयी क्या हुई? वो गम है ये भी गम है.
Subscribe to:
Posts (Atom)