Thursday, April 23, 2009

वो शम्मा भी चली गयी.

दिन गुज़र गया,
रात भी चली गयी,
जो दिल मे थी,
हर बात भी चली गयी.
सहारा था जिसका,
इशारा था उसका,
एक इशारे के साथ,
वो बात भी चली गयी.
नज़रों का धोखा था,
या मरहम दिल का,
दो पल की वो आशनाई,
दर्द देकर चली गयी.
अब क्या आरजू,
उनसे मिलने की,
जो आस थी झूठी,
वो आस भी चली गयी,
गमो का अँधेरा,
आज भी साथ है,
उनसे मिलने आई,
वो शम्मा भी चली गयी.

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