आरजू-ए-गुफ्तगू मे साकी मिले,
हयात-ए-जुस्तजू से जुदाई लेकर,
शब होती गयी बेसबब बातों मे,
बेइन्तहा सहर की अगुवाई लेकर,
ऊम्र भर यूँ कभी तमाशे न हुए,
जज्ब जस्बात की रुसवाई लेकर,
है अब दुनिया से शिकवा न कोई,
आजाद खयालो की इब्तिदाई लेकर,
रात न थी खयालो मे मुक़र्रर जानिब,
सुबह आई है अर्क-ओ-रोशनाई लेकर.
इस दुनिया का क्या होता है "गुलफाम" ?,
सदा निकली है दिल से आशनाई लेकर,
जुस्तजू = quest, जज्ब =suppressed/hidden, इब्तिदाई = start, मुक़र्रर = fixed/determined, जानिब= side, अर्क=ray , सदा = sound.
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