जीते हैं कोई और समझ कर खुद को
आइना अब अच्छा नहीं लगता,
पीया है जो आँखों से एक बार,
मयखाना अब अच्छा नहीं लगता,
पल जो थोड़े बीते साथ उनके,
दुनिया का वहम अच्छा नहीं लगता.
याद करते हैं इतना हम उनको ,
दूर होने का सितम अच्छा नहीं लगता.
अब उनके सिवा कुछ भी सच्चा नहीं लगता.
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