Wednesday, April 22, 2009

अभी अभी कुछ हुआ

किसी के दिल को रौंदा गया पैरों तले
किसी के घावों पे नमक छिड़का गया,
किसी बेदिल ने अट्टहास किया,
लो फिर वही कहानी दुहराई गयी.

किसी निराश की बेखुदी को छेडा,
किन्ही मासूम खयालो को कुरेदा गया,
किसी नाकाम से दिल्लगी की,
लो फिर आँखों से रुलाई गयी,

शरीर मे लोथड़ों को नोचा
मशीनी सांसो को नापा गया ,
रूह पुरानी जला दी गयी ,
वेश्या सरे-राह नचाई गयी,

गम के पोरों को खोजा,
दिली नासूरों को उधेडा गया,
जले हुए शरीर मे फिर फिर,
मृत्यु ज्योत जलाई गयी.

गमो से दोस्ती,
तन्हाई का साथ,
बेखुदी का आलम,

बेजा हैं ये सब आजकल,
क्या दुनिया से आशनाई गयी?

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