एहसान हैं उनका हमपे
हम उनसे जिए जाते हैं,
मर तो पहले ही चुके थे
अब जहर पीये जाते हैं,
मिलते हैं जब हम उनसे,
मैकदे उनको लिए जाते हैं,
शुरुर मे पहले ही से थे,
अब जाम पीये जाते हैं,
सोचते हैं उनको उनकी तरह,
साथ मे उनको जिए जाते हैं,
कब्र हम पहले ही से थे,
अब दफ़न हुए जाते हैं,
सुनते हैं जब हमको हमसे,
हम उनकी कहे जाते हैं,
खामोश हम पहले ही से थे,
अब खामोशी कहे जाते हैं,
मरहम जख्मो पे लगाते,
वो रहम किये जाते हैं,
दर्द जो झूठा ही तो था,
अब सच्चा किये जाते हैं,
वो फ़रिश्ते अल्लाह के,
करम हमपे किये जाते हैं,
दोजख हम जा ही चुके थे,
अब तौबा किये जाते हैं.
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