आवाजो की दुनिया मे,
कभी अचानक
सब कुछ शांत हो जाता
एक हलकी सी आहट,
और सब कोलाहल मे बदल जाता,
ऐसा ही चला आ रहा है,
सदियों से,
अनेक आवाजें,
इस कोलाहल मे,
अपना अस्तित्व खोजतीं,
कुछ कर्कश, कुछ मधुर,
कोई तेज, कोई मंथर,
हर एक आवाज अलग,
मेरी आवाज खो गयी मालूम होती है,
या फिर शायद मैंने जाना ही नहीं,
किसी को पता है;
के मेरी आवाज कौन सी है?
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