Friday, May 15, 2009

अंदाज़-ए-शायर

पहली झलक वो  उनकी, ताज़ा है जेहन मे,
अदाएं उल्फत के, गेसू चिलमन सा लगते हैं.

सांसो की वो महक उनकी, फिजाओं मे तैरती है,
आहें आरजू के, दामन परवाज सा लगते हैं,

जादू वो आवाज मे उनके, संगीत सा कानो मे,
कशिश चाहत के, होंठ नगमा सा लगते हैं.

पैराहन बदन पर उनके, चेहरे पर मुस्कान,
इरादे हुस्न के, अंदाज़ कातिल सा लगते है

न पाकर सामने उनको,  बनाई तस्वीर दिल मे, 
रंग मोहब्बत के, आँखे आइना सा लगते हैं,

उनकी चाहत ने, एक और "गुलफाम" बनाया,
मिजाज़ आशिक के, अंदाज़ शायर सा लगते हैं.


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