उनींदी सी वो सुबह, उदास सा वो मंजर,
खुशियों का वादा, अपनेपन का साथ,
भेद कुछ खोलने, कुछ बनाने निकले,
छोटी सी वो सवारी छोटा सा वो सफ़र,
कोई कितना अलग, कोई कितना जुदा,
कोई किसीसे खफ़ा, कोई उम्मीद लिए,
कुछ रिश्ते जोड़ने, कुछ कहानिया बुनने,
मिले कुछ साथी, शायद पिछला था बदा,
तार कई अनदेखे, दिलो को जोड़ते ,
संभलते कदम, क्यारियों की मेड पे,
हवावों की लिखी, रेत पे इबारत पढ़ते,
मासूमियत के बहाव से, बांधो को तोड़ते,
कुछ अनगढ़ पर, सम्पूर्ण जीवन पाते,
बटोरते बिखरे रूहानी तजुर्बात,
कुछ और अनदेखे तार जोड़ लेते ,
महसूसते, और रूहानियत को बड़ा पाते.
छोटो सा ये जीवन, पर विस्तार अनंत,
अभी एक झरोखे से सिर्फ झाँका है,
क्या मिलेगा आराम की सौ सर्दियाँ से?
मिला जो प्रकृति का, एक सम्पूर्ण बसंत.
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