दीवानों से फिरते हैं , सोचते हैं माज़रा क्या है?
घूमते हैं रस्ते पे, बेखुदी मे आसरा क्या है?
[माज़रा= matter, आसरा= shed ]
गम-गुफ्तारी मैखाने मे , पूछते हैं पैमाना क्या है?
गिनते हैं धडकने सीने मे, दिल का जुर्माना क्या है?
[गम-गुफ्तरी=talking of पैन]
झगड़ते हैं खैरख्वाहों से , देखते हैं जामा क्या है?
पाते हैं खुद को उफक पे, तन्हाई का सामा क्या है?
[खैरख्वाहों= wel wishers, जमा= group/society, उफक=horizon ]
हैं आँखे तर अश्कों से, जहाँ मे पाना क्या है?
गम-ए-हयात हासिल है, अब और कमाना क्या है?
[तर=wet, अश्कों= tears, हयात= life]
जिन्दगी बेलगाम छोडा किये, सोचने से होना क्या है?
हुए बहुत से शाइर, "गुलफाम" अब रोना क्या है?
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1 comment:
सोचने से और करने से नहीं...
तो और किस्से होना है,
जो होना है वो यहीं और हम ही से होना है |
क्या सिखा क्या न सिखा हमने....
कुछ बनाया या बिगाडा हमने....
और जो पाया या जो खोया हमने....
सब तो हमारे सोचने और करने का ही नतीजा हैं |
जो रोया और जो हंसा है हमने....
जो जिया और जो न जिया है हमने....
और जो रिश्ते जोड़े और तोडे हैं हमने....
वो भी तो इस सोचने और करने से ही है |
कुछ करते और कुछ सोचते तो हैं सब लोग,
और कुछ जीते और कुछ मरते भी हैं सब लोग,
लकिन जो लोग इस बात को जान ले.....
कि उनके सोचने और करने से,
उनका जीना और मरना है कितना निर्धारित होता,
तो क्या कुछ नहीं कर सकते हैं लोग ||
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